राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने कहा मुझे नहीं चाहिए बढ़ा हुआ वेतन

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         रायपुर. साल 2018 के बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने देश के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यों के गवर्नरों की सैलरी में भारी-भरकम इजाफा किया था. नए इजाफे के तहत राज्यों के गर्वनरों की एक महीने की सैलरी 3 लाख 50 हजार रुपये कर दी गई है. जबकि पहले गवर्नरों की सैलरी एक लाख दस हजार रुपये थी. सैलरी में हुए इस तीन गुना इजाफे को छत्‍तीसगढ़ के गर्वनर बलरामजी दास टंडन ने लेने से इनकार कर दिया है. राज्यपाल बलरामजी दास टंडन ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ के महालेखाकार को मई 2018 को पत्र लिखकर पुराना वेतनमान 01 लाख 10 हजार रुपये ही लेने की इच्छा जताई है. राज्यपाल के पत्र के आधार पर उनका वेतन 01 लाख 10 हजार ही करने पर महालेखाकार द्वारा सहमति प्रदान की गई है. गौरतलब है कि केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा मार्च 2018 में जारी राजपत्र के अनुसार राज्यपालों के वेतन में वृद्धि की गई है. जुलाई 2014 में बलरामजी दास टंडन को छत्तीसगढ़ का गवर्नर बनाया गया था. बलरामजी दास टंडन 1953 में पहली बार अमृतसर म्यूनसिपल कॉरपोरेशन के कॉरपोरेटर बने थे. बलरामजी दास टंडन अमृतसर से चार बार पंजाब विधानसभा के सदस्य चुने गए. टंडन पंजाब सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और उद्योग, स्वास्थ्य, श्रम और रोजगार जैसे अहम मंत्रालय भी संभाल चुके हैं.

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