“छत्तीसगढ़ रिपोर्टर” ने छत्तीसगढ़ राज्य सहित देश के तीन दर्ज़न से भी अधिक अरबों-खरबों रुपये के बड़े-बड़े घोटालों को देशहित व जनहित में पर्दाफाश किया है|...* "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" देशहित एवं जनहित में बड़े-बड़े घोटाले का लगातार कर रहा है पर्दाफाश... I * '' 5 राज्यों के 8 कोल ब्लॉकों को अदानी के हवाले में बड़ा खेल, 1 लाख 40 हजार करोड़ से भी अधिक का घोटाला ''... I * * 9 राज्यों के 102 खनिज संपदा ब्लॉकों की नीलामी की तैयारी, 1.80 लाख करोड़ रुपये मिलने की संभावना |... * कोल ब्लॉकों की 31 ई-नीलामी और 53 आवंटन से देश को 3.94 लाख करोड़ का फायदा, फिर निजीकरण क्यों ? |*...* छतीसगसढ़ को कोयले के कम रायल्टी से 9 लाख करोड़ का नुकसान I... एसईसीएल में डिसेंट हाउसिंग के तहत 5 अरब रुपये के सौंदर्यीकरण में लीपापोती !

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"छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के बारे में

     भागवत जायसवाल

       ( प्रधान संपादक )

"छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" निर्भिक, निष्पक्ष खोजपूर्ण समाचार पत्र है l भागवत जायसवाल ने बिलासपुर से "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" हिंदी साप्ताहिक का प्रकाशन 6 सितम्बर 1997 में किया l तब बिलासपुर, मध्यप्रदेश राज्य में था l अब छत्तीसगढ़ राज्य में है l "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" ने अधिकतर खोजी खबरें एवं विशेष रिपोर्ट तथा जनहित मुद्दों को प्राथमिकता से प्रकाशित करता है l "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के खबरों का असर पूरे देश में होता है l "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" ने छत्तीसगढ़ राज्य सहित देश के तीन दर्जन से भी अधिक अरबों-खरबों रुपये के बड़े-बड़े घोटालों से देश को पहुंच रही क्षति को देखते हुए जोखिम भरा कारनामा देशहित व जनहित में पर्दाफाश किया है l "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के इन खुलासों को राष्ट्रीय अखबारों ने भी गंभीरता से लेते हुए अपने-अपने स्तर पर समाचार प्रकाशित किया करते हैं l जिसमें प्रतिष्ठित राष्ट्रीय हिंदी दैनिक "पंजाब केसरी" दिल्ली के संपादक श्री अश्विनी कुमार ने "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के खुलासों को अपने सम्पादकीय में स्थान देते हुए एक सप्ताह तक क्रमशः प्रकाशित किया l उसके बाद "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के 26 नवम्बर से 2 दिसम्बर 2012 के अंक में "लाखों करोड़ के कोल ब्लॉक घोटालेबाजों को बचाने में लगी सरकार" के शीर्षक से प्रकाशित तीसरे खुलासे को "पंजाब केसरी" के सभी संस्करणों के मुख्य पृष्ठों पर दिनांक 11 दिसम्बर 2012 से 20 दिसम्बर तक लगातार भागवत जायसवाल, बिलासपुर के नाम के साथ "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" का भी उल्लेख करते हुए 10 दिनों तक मुख्य पृष्ठों पर क्रमशः प्रकाशित किया l इसी प्रकार "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के 27 जनवरी से 2 फरवरी 2014 के अंक में "कोल ब्लॉक आवंटन घोटाले में दर्जनों जा सकते हैं जेल" के शीर्षक से प्रकाशित चौथा बड़ा खुलासा को दिल्ली के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय हिन्दी दैनिक "पंजाब केसरी" ने पुनः अपने सभी संस्करण के मुख्य पृष्ठ पर दिनांक 3 फरवरी से 26 फरवरी 2014 तक लगातार भागवत जायसवाल, बिलासपुर छत्तीसगढ़ के नाम के साथ राष्ट्रीय हिन्दी साप्ताहिक "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" का भी उल्लेख करते हुए 23 दिन तक मुख्य पृष्ठ पर क्रमशः प्रकाशित किया, जो राष्ट्रीय हिन्दी पत्रकारिता के इतिहास में पहली बार हुआ हैl

जिस कोयला घोटाले को लेकर पूरे देश में कोहराम मचा, उसका सर्वप्रथम खुलासा "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" ने 21 से 27 नवंबर 2011 के अंक में "कोल ब्लॉक आवंटन में लाखों करोड़ का घोटाला" के शीर्षक से खुलासा देशहित एवं जनहित में किया था l यह विशेष खोजी रिपोर्टर 9 पृष्ठों में थी l जिस में 100 सरकारी एवं 186 निजी कंपनियों को कोल ब्लॉक आवंटन सहित सरकार द्वारा निरस्त किये गए 24 कंपनियों के कोल ब्लॉक सहित कुल 310 कंपनियों के नाम तथा कोयला भंडार की सूची के अलावा कोल ब्लॉक आवंटन में कैसे नियम-कायदे को ताक में रखकर बड़े-बड़े उधोगपतियों को कोल ब्लॉक आवंटन किया जिसका महत्वपूर्ण दस्तावेजों के साथ खुलासा होते ही यह खबर आग की तरह पूरे देश में फैल गई और इस खबर को देश के विभिन्न पार्टियों के नेताओं ने गंभीरता से लिया और "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के प्रति को संलग्न कर प्रधानमंत्री, कोयला मंत्री,सीवीसी,सीएजी एवं सीबीआई को पत्र लिखकर शीघ्र कार्रवाई की मांग की तथा लोकसभा एवं राज्यसभा में लगातार भारी हंगामे के बाद केंद्र में बैठी तत्कालीन डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार ने आनन-फानन में सीबीआई जांच शुरू की l इधर "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के खुलासे के बाद सुप्रीम कोर्ट में 3 लोगो ने अलग-अलग याचिका दायर किया, जिसमे श्री मनोहरलाल शर्मा, अधिवक्ता दिल्ली ने 18 सितम्बर 2012 में रिट पिटीशन (सिविल) नं. 463 और श्री प्रशांत भूषण की संस्था कॉमन काज दिल्ली ने 24 नवम्बर 2012 में रिट पिटीशन (सिविल) नं. 515 तथा श्री सुदीप श्रीवास्तव अधिवक्ता बिलासपुर छत्तीसगढ़ ने फरवरी 2013 को रिट पिटीशन (सिविल) नं. 283 के तहत याचिका दायर किया l इन तीनों याचिकाओं को एक साथ सम्मिलित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की, जिसका रिट याचिका (सीआरएल) नं. 120 ऑफ 2012 है l जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने सरकार द्वारा 23 जून 2011 को 24 निरस्त किए गए, कंपनियों कोल ब्लॉक सहित कुल 310 कंपनियों को आवंटित 208 में से 204 कोल ब्लॉकों के आवंटन को अवैध ठहराते हुए 24 सितम्बर 2014 के अपने अंतिम फैसले में 310 कंपनियों में से 4 कंपनियों का कोल ब्लॉक आवंटन रद्द नहीं करते हुए शेष 204 कंपनियों के कोल ब्लॉक आवंटन को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया, तथा यह भी स्पष्ट किया है कि सीबीआई जिन 12 कोल ब्लॉकों की जांच कर रही है, वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी जांच जारी रहेगी l जिसमें से 40 कंपनियों में कोयला उत्पादन चालू हैं, उसे 6 महीने तक राहत देते हुए प्रति टन कोयला पर 295 रूपए का रायल्टी भुगतान सरकार को करना होगा तथा इस दौरान उत्पादन का अधिकार मौजूदा प्रबंधन के पास ही रहेगा l सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इन सभी कोल ब्लॉकों को 31 मार्च 2015 तक नये सिरे से आवंटित करने या कोल इंडिया को सौंपने का आदेश दिया था l इस सम्पूर्ण मामले का मुख्य रूप से सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री आर.एम्. लोढ़ा, न्यायाधीश श्री मदन बी. लोकुर तथा न्यायाधीश श्री कुरियन जोसेफ की बैंच ने 25 अगस्त 2014 को कोल ब्लॉक आवंटन मामले में 162 पृष्ठों में पहला फैसले दिए तथा 24 सितम्बर 2014 को 27 पृष्ठों में अंतिम फैसले दिये l सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के खुलासों पर मुहर लगा दी l सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए कोल ब्लॉकों को 31 मार्च 2015 तक नये सिरे से आवंटन करने या कोल इंडिया को सौपने का आदेश केंद्र सरकार को दिया था l उसके बाद केंद्र सरकार ने 31 निजी कंपनियों को ई-नीलामी के जरिए तथा 58 सरकारी कंपनियों को आवंटन किया गया है l जिससे सरकार को 3.94 लाख करोड़ रूपए का संभावित आय हुआ है तथा 115 कोल ब्लॉक बचे हैं, जिससे लाखों करोड़ का फायदा होगा l यह फायदा 3.94 लाख करोड़ रूपए का सरकार को हुआ है, यह "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" के खुलासे के कारण हुआ है l इसके आलवा "छत्तीसगढ़ रिपोर्टर" देशहित व जनहित में अरबों-खरबों रुपये बड़े-बड़े घोटाले का लगातार कर रहा हैं, पर्दाफाश...l जिससे देश के बड़े उद्योगपतियों, भ्रष्ट अधिकारियो और राजनेताओं तथा कोल माफियाओ में भारी हड़कंप मचा हुआ है।

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